हाईवे के ट्रक

by प्रवीण पाण्डेय

कभीभारी भरकम ट्रकों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर भागते देखा है?देखा होगा और उससे पीड़ित भी हुये होंगे पर उनके चरित्र परध्यान नहीं दिया होगा। सामने से आतेट्रक आपको अपनी गति कम करने और बायें सरक लेने को विवश कर देते हैं, बड़ा भय उत्पन्न करते हैं ये ट्रक सड़क पर, आप चाहें न चाहें एक आदर देना पड़ता है, जब तक ये निकल न जाये आप निरीह से खड़े रहतेहैं, सड़क से आधे उतरे।
यदि आपभी इन ट्रकों की दिशा में जा रहे हों तो संभवतः भय नहीं रहता है। आपके वाहन की गतिबहुधा इन भारी भरकम ट्रकों से बहुत अधिक रहती है, यदि आप उन्हें एक बार पार कर लें तो उनसे पुन: भेंट होने की संभावना कम ही होती है। थोड़ी सावधानी बस उन्हें पार करनेमें रखी जाये तो निरीह से ही लगते हैं ये ट्रक।
कभी कभीयही ट्रक प्रतियोगिता पर उतर आते हैं। पिछले दिनों मैसूर से बंगलोर आते समय लगभगएक घंटे तक यह प्रतियोगिता देखी भी और उससे पीड़ित भी होते रहे। दो भारी भरकम ट्रकआगे चल रहे थे, एक दूसरे से होड़लगाते हुये। एक दूसरे से सट कर चल रहे थे, कभी एक थोड़ा आगे जाने का प्रयास करता तो कभी दूसरा, कोई भी स्पष्ट रूप से आगे नहीं निकल पा रहा था।दोनों की ही गति 50 के आसपास थीक्योंकि मेरा वाहन भी लगातार वही गति दिखा रहा था। सड़क 100की गति के लिये सपाट है, आपका वाहन भी उन्नत तकनीक के इंजन से युक्त है और 150 की गति छूने की क्षमता रखता है। उन ट्रकों कीप्रतियोगिता के आनन्द के सामने आपके वाहन की गति धरी की धरी रह जाती है। 50 की गति सड़क खा जाती है, 50 की गति हाईवे के ये ट्रक। आप कितना उछलकूदमचा लीजिये, आपका वाहन कितना हार्नफूँक ले, जापानी विशेषज्ञों नेकितना ही शक्तिशाली इंजन बनाया हो, आपकेवाहन का आकार कितना ही ऐरोडायनिमिक हो, आप अपनी एक तिहाई क्षमता से आगे बढ़ ही नहीं सकते।

आगे निकलो तो जाने
यह सबदेख रागदरबारी के प्रथम दृश्य का स्मरण हो आया। सड़क पर और आने वाले यातायात परअपना जन्मसिद्ध बलात अधिकार जमाये इन ट्रकों का कुछ नहीं किया जा सकता है। अपनेआगे दसियों किलोमीटर का खाली मार्ग उन्हें नहीं दिखता है,पीछे से सवेग चले आ रहे वाहनों की क्षमताओं का भी भान नहींहै उन्हें, यदि उन्हें कुछ दिखता हैतो उनके बगल में चल रहा उनके जैसा ही भारी भरकम और गतिहीन ट्रक, आपसी प्रतियोगितालगा उनका मन और उसी खेल में बीतता उनका जीवन।
उपयुक्ततो यही होता कि दोनों ही एक ही लेन में आ जाते और पीछे से आने वाले गतिशील वाहनोंको आगे निकल जाने देते, जिससे उनकीभी चाल अवरोधित नहीं होती। वे ट्रक नहीं माने, स्वयं तो प्रतियोगिता का आनन्द उठाया और हम सबको पका दिया। वह तो भला होकि एक जगह पर तीन लेन का रास्ता मिल गया, वहाँ पर थोड़ी गति बढ़ाकर कई वाहन उन मदमत्त ट्रकों से आगे निकल गये।
जातेजाते बस पीछे देख ट्रकों को यही कह पाये कि भैया जब दम नहीं है तो काहे सड़क घेरे चल रहे हो।

चित्र साभार – http://tlhtc.blogspot.com

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