चेहरों का संवाद

by प्रवीण पाण्डेय

बंगलोरमें जहाँ मेरा निवास है, उससे बस 50 मीटर की दूरी पर ही है फ्रीडम पार्क। एकपुराना कारागार था, बदल करस्वतन्त्रता सेनानियों की स्मृति में पार्क बना दिया गया। पार्क को बनाते समय एकबड़ा भाग छोड़ दिया गया जहाँ पर लोग धरना प्रदर्शन कर सकें। यहीं से नित्य आनाजाना होता है क्योंकि यह स्थान कार्यालय जाने की राह में पड़ता है। सुबह टहलने औरआगन्तुकों को घुमाने में भी यह स्थान प्रयोग में आता है।
फ्रीडम पार्क
लगभग हरतीसरे दिन यहाँ पर लोगों का जमावड़ा दिखता है। कभी पढ़े लिखे, कभी किसान, कभी आँगनवाड़ी वाले, कभीशिक्षक, कभी वकील, और न जाने कितने लोग, समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुये। सुबह से एकत्र होते है, सायं तक वापस चले जाते हैं। पुलिस और ट्रैफिककी व्यवस्था सुदृढ़ रहती है, बसथोड़ी भीड़ अधिक होने पर वाहन की गति कम हो जाती है।
इतनासमय या उत्साह कभी नहीं रह पाता है कि उनकी समस्याओं को सुना और समझा जा सके। उनविषयों को समस्यायें खड़े करने वाले और उन्हें सहने वाले समझें, मैं तो धीरे से पढ़ लेता हूँ कि बैनर आदि मेंक्या लिखा है, यदि नहीं समझ में आताहै तो अपने चालक महोदय से पूछ लेते हैं कि कौन लोग हैं और किन माँगों को मनवानेआये हैं। अब तो चालक महोदय हमारे पूछने से पहले ही विस्तार से बता देते हैं।
इसप्रकार समस्याकोश का सृजन होने के साथ साथ, प्रदर्शनकारियों के चेहरों से क्या भाव टपक रहे होते हैं, उनका अवलोकन कर लेता हूँ। कवियों और उनकीरचनाओं में रुचि है अतः वह स्थान पार होते होते मात्र एक या दो पंक्तियाँ ही मनमें आ पाती हैं।
कभीव्यवस्था से निराश भाव दिखते है,
जग कोबनाने वाले, क्या तेरे मन में समायी,
तूनेकाहे को दुनिया बनायी?
कभीव्यवस्था का उपहास उड़ाते से भाव दिखते है,
बर्बादगुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी था,
हर शाखपे उल्लू बैठा है, अंजामगुलिस्तां क्या होगा?
कभीव्यवस्था के प्रति आक्रोश के भाव दिखते हैं,
गिड़गिड़ाने का यहां कोई असर होता नही 
पेट भरकर गालियां दो, आह भरकर बददुआ।
पिछले तीन दिनों से यहाँ से निकल रहा हूँ, लोग बहुत हैं, युवा बहुत हैं, उनके भी चेहरेके भाव पढ़ने का प्रयास करता हूँ। किन्तु पुराने तीन भावों से मिलती जुलती नहींदिखती हैं वे आँखें। मन सोच में पड़ा हुआ था। आज ध्यान से देखा तो और स्पष्ट हुआ, सहसा राम प्रसाद बिस्मिल का लिखा याद आ गया। हाँ, उनकी आँखें बोल रही थीं,
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है।



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