संग्रहण और प्रवाह

by प्रवीण पाण्डेय

मानवमस्तिष्क की एक क्षमता होती है, स्मृतिके क्षेत्र में। बहुत अधिक सूचना भर लेने के बाद यह पूरी संभावना रहती है कि आगतसूचनायें ठहर नहीं रह पायेंगी और बाहर छलक जायेंगी। यह न हो, इसके लिये बहुत आवश्यक है कि उन्हें लिख लियाजाये। तीक्ष्ण बुद्धि के स्वामी भी स्मृति लोप से ग्रसित रहते हैं, जोर डालते हैं कि क्या भूल रहे हैं? अतः जिस समय जो भी विचार आये, लिख लिया जाये। यह आप निश्चय मान लीजिये यदि वहविचार दुबारा आता है तो आप पर उपकार करता है। अब विचार कहीं पर भी आ सकता है तोतैयारी सदा रहनी चाहिये उसे लिख लेने की। या तो एक छोटी सी डायरी हो एक पेन के साथया आप अपने मोबाइल में ही लिख सकें वह विचार। मुझे भी अपनी स्मृति पर उतना भरोसानहीं है, मुझे जो भी विचार उपहारमें मिलता है मैं समेट लेता हूँ।
इसीप्रकार अध्ययन करते समय कई रचनायें व विषय समयाभाव के कारण उसी समय नहीं पढ़े जासकते हैं, यह आवश्यक है कि उन्हेंकिसी ऐसी जगह संग्रहित कर लिया जाये जहाँ पर आप समय मिलने पर विस्तार से पुनः पढ़सकें। किसी विषय पर शोध करने पर बहुत सी सूचनायें प्रथमतः पृथक स्वरूप में होती हैपर उनका समुचित विश्लेषण करने के लिये उन्हें एक स्थान पर रखना आवश्यक होता है।कभी इण्टरनेट में, कभी पुस्तक में, कभी दीवार पर, कभी सूचना बोर्ड पर, कभीचित्र के माध्यम से, कभी वाणी रूपमें, कभी मैसेज में, कभी ईमेल में, कभी ब्लॉग में, हर प्रकारसे आपको सम्बन्धित तथ्य मिलते रहते हैं, आपको सहेजना होता है, रखनाहोता है, एक स्थान पर, भविष्य के लिये।
साहित्यके अतिरिक्त भी, अपने अपनेव्यावसायिक क्षेत्रों में सम्बद्ध ज्ञानसंवर्धन और नियमावली अपना महत्व रखते हैं और आपकी निर्णय प्रक्रिया कोप्रभावित करते हैं। औरों पर निर्भरता कम रहे और निर्णय निष्पक्ष लिये जायें, उसके लिये भी आवश्यक है कि हम अपना ज्ञानसंग्रहित और संवर्धित करते चलें। सामाजिक और व्यावसायिक बाध्यतायें आपको ढेरोंसंपर्क, तिथियाँ, बैठकें, कार्य, निर्देश आदि यादरखने पर विवश करेंगी, उन्हें कैसेसहेजना है, कैसे उपयोग में लाना हैऔर कैसे उन्हें अगले स्तर पर पहुँचा प्रवाह बनाये रखना है, यह स्वयं में एक बड़ा और अत्यन्त ही आवश्यक कार्य है।
डिजिटलरूप में विविध प्रकार की सूचना का संग्रहण मुख्यतः आपके कम्प्यूटर में होता है, आपका ज्ञान आपके साथ और चल सकता है यदि आपकेपास लैपटॉप हो। सूचनाओं के एकत्रीकरण के लिये एक उपयोगी मोबाइल और सूचनाओं केबैकअप के लिये इण्टरनेट का प्रयोग आपके संग्रहण को पूर्ण बनाता है। लैपटॉप, मोबाइल और इण्टरनेट, ये तीन अवयव एक दूसरे के पूरक भी हैं और आवश्यक समग्रता भी रखते हैं। आपकासंग्रहणप्रवाह इन तीनों पर आधारितबने रहने से कभी अवरुद्ध नहीं होगा।
लैपटॉप, मोबाइल, इण्टरनेट – सूचना तिमूर्ति
सूचनाके संग्रहण के तीन अवयव किसी एक डोर से बँधे हों जिससे इन तीनों के समन्वय मेंआपको कोई प्रयास न करना पड़े। कहीं भी और किसी भी माध्यम से एकत्र सूचना इन तीनअवयवों में स्वमेव पहुँच जानी चाहिये। कहीं आपको इण्टरनेट नहीं मिलेगा, कहीं आपका लैपटॉप आपके पास नहीं रहेगा, कई बार आप मोबाइल बदल लेते हैं या खो देते हैं।यह सब होने पर भी आपका सूचनातंत्रनिर्बाध बढ़ना चाहिये। किसी भी सूचना का आपकी परिधि में बस एक बार आगमन हो, उसे उपयोग में लाने के लिये बार बार बदलना नपड़े। जब मैं लोगों को मोबाइल बदलते समय सारे संपर्क हाथ से भरते हुये या सिमकार्डसे बार बार कॉपी करते हुये देखता हूँ तो मुझे ऊर्जा व्यर्थ होते देख दुःख भी होताहै और क्षोभ भी।
सूचनाओंका संग्रहण और समग्र समन्वय, तीनोंअवयवों में उनका स्वरूप, एकत्रीकरणऔर विश्लेषण में लचीलापन, समय पड़नेपर उनकी खोज। इन विषयों का महत्व जाने बिना यदि आप मोबाइल का चयन, लैपटॉप पर संग्रहक प्रोग्राम का चयन औरइण्टरनेट पर इन सूचनाओं के स्वरूप का चयन करते हैं, तो संभव है कि आपका संग्रहण आपकी ऊर्जा और समय व्यर्थ करेगा।
असहज मतहों, इन सिद्धान्तों को मन में बिठालेने के पश्चात जो भी आपके संग्रहण का प्रारूप होगा, वह आपको ही लाभ पहुँचायेगा। इस प्रकार संरक्षित ऊर्जा और समय साहित्यसंवर्धन में लगेगा।
इस बारआप अपने संग्रहण के प्रारूप पर मनन कर लें, अगली बार बाजी पास नहीं करूँगा, अपने पत्ते दिखा दूँगा।

चित्र साभार – http://jjinux.blogspot.com/
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