आधुनिक झुमका

by प्रवीण पाण्डेय

तकनीक हमारी जीवनशैली बदल देती है। नयी जीवनशैली नये अनुभव लेकर आती है। दो घटनायें ही इस तथ्य को स्थापित करने के लिये पर्याप्त हैं।
सामने से आते एक व्यक्ति को हल्के से मुस्कराते हुये देखता हूँ, सोचता हूँ कि कोई परिचित तो नहीं, याद करने का यत्न करता हूँ कि कहाँ देखा है, जैसे जैसे पग आगे बढ़ाता हूँ अपनी स्मरणशक्ति पर झुँझलाहट होने लगती है, भ्रममध्य में खड़ा परिचयअपरिचय की मिश्रित भंगिमा बनाकर उनके सम्बोधन की डोर ढूँढ़ता हूँ, किन्तु आगन्तुक बिना कुछ कहे ही निकल जाते हैं। अरे, तो मुस्कराये क्यों थे, थोड़ा ध्यान से देखा तो महाशय ब्लूटूथ पर अपनी प्रेमिका से बतिया रहे थे और हमारी स्मरणशक्ति पर अकारण ही जोर डाल रहे थे। चलिये, एक बार स्मरणशक्ति पर तो आक्षेप सहा जा सकता है पर जब सामने से यही प्रक्रिया कोई कन्या कर बैठे तो आप वहीं खड़े हो जायेंगे, किंकर्तव्यविमूढ़ से। यदि दुर्भाग्यवश आपकी पत्नी आपके साथ में हों तो संशयात्मक भँवरों में उतराने के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं बचेगा आपके लिये।
एक साफ्टवेयर कम्पनी में कार्यरत पतिदेव अपनी श्रीमतीजी के साथ होटल में खाने जाते हैं। इसी बीच एक अन्तर्राष्ट्रीय कान्फ्रेन्स कॉल आ जाती है, पत्नी को बिना कुछ बताये पतिदेव कान में ब्लूटूथ लगाकर वार्तालाप सुनने लगते हैं, पर आँखें एकाग्र अपनी पत्नी पर टिकाये हुये। पत्नी का हृदय आनन्द में हिलोर उठता है, उन्हें लगता है कि पुराने दिन पुनः वापस आ गये हैं, आनन्दविभोर उनकी माँगों की सूची धीरे धीरे शब्दरूप लेने लगती हैं एक के बाद एक, वह भी बड़े प्यार से, पति एकाग्रचित्त हो सप्रेम देखते ही रहते हैं। अब सूची इतनी बड़ी हो गयी कि पत्नी को संशय होने लगा, अटपटा भी लगने लगा, सकुचा कर पत्नी शान्त हो जाती हैं। उसी समय कॉल समाप्त होती है और पति उत्सुकता वश पूछ बैठते हैं कि आप कुछ कह रहीं थी क्या? उफ्फ…, अब शेष दृश्य आप बस कल्पना कर लीजिये, मुझमें तो वह सब सुनाने की सामर्थ्य नहीं है।
ब्लूटूथ सेट
कान में लगाने वाला ब्लूटूथ का यन्त्र आधुनिक जीवनशैली का अभिन्न अंग है। जिन्होने आधा किलो के फोन रिसीवर का कभी भी उपयोग किया है, उनके लिये डेढ़ छटाक का यह आधुनिक झुमका किसी चमत्कार से कम नहीं है। आप बात कर रहे हैं पर आपके दोनों हाथ स्वतन्त्र हैं, कुछ भी करने के लिये। न जाने कितने लोग इसका उपयोग कर गाड़ी चलाते हुये भी बतियाते हैं, ट्रैफिकवाला भले ही कितनी भी बड़ी दुरबीन लेकर देख ले, उसे किसी भी नियम का उल्लंघन होता हुआ नहीं दिखायी देगा, अपितु लगेगा कि कितने एकाग्र व प्रसन्नचित्त वाहन चालक हैं।
निश्चय ही बहुत घटनायें होंगी, चलते चलते खम्भे से भिड़ने की या चलाते चलाते गाड़ी भिड़ाने की। आधुनिक झुमका होने से कम से कम इतनी सुविधा तो है कि दोनों हाथ खाली रहते हैं, स्वयं को सम्हालने के लिये। एक हाथ में मोबाइल होने से तो भिड़ने व भिड़ाने की सम्भावनायें दुगनी हो जाती हैं।
हमारे पास भी आधुनिक झुमका है, फोन आते ही कान में लगा लेते हैं। सुरक्षित क्षेत्र में हैं क्योंकि न ही गाड़ी चलाते हैं और न ही हँसकर बात करने वाली कोई प्रेमिका ही है। बात करते करते निर्देशों को मोबाइल पर ही लिख लेते हैं, बात यदि हल्की फुल्की हो तो मेज पर हल्का सा तबला बजा लेते हैं, बात यदि बहुत लम्बी चलनी हो तो घर में फैला हुआ सामान समेटने में लग जाते हैं।
आधुनिक झुमका
कल ही पढ़ा है कि मोबाइल तरंगें, ब्लूटूथ तरंगों से अधिक घातक होती हैं, कैंसर तक हो सकता है, आधुनिक झुमका लेना हमारे लिये व्यर्थ नहीं गया। मोबाइल भी आवश्यक है और शरीर भी, दोनों में सुलह करा देता है यह आधुनिक झुमका। कम से कम साधनों में जीने वाले जीवों को एक अतिरिक्त यन्त्र को सम्हाल कर रखना बड़ा कष्टप्रद हो सकता है पर स्वास्थ्य, सुरक्षा और सौन्दर्य की दृष्टि से यह आवश्यक भी है। श्रीमतीजी के कनकछल्लों से तो बराबरी नहीं कर पायेगा आधुनिक छल्ला पर इसे पहन कर आप अधिक व्यस्त और कम त्रस्त अवश्य ही दिखेंगे।
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