काइनेक्ट

by प्रवीण पाण्डेय

वीडियो गेम के चहेतों के बारे में आपकी क्या अवधारणा है? एक बच्चा जिसको स्क्रीन पर लगातार आँख गड़ाये रहने से चश्मा लग गया है, या एक बच्चा जिसके अँगूठे कीपैड पर चलते रहने से उसकी बाहों से अधिक शक्तिशाली हो गये हैं, या एक बच्चा जिसकी मानसिक शक्तियाँ अनवरत निर्णय लेते रहने से उसकी शारीरिक क्षमताओं पर भारी पड़ने लगी हैं। मेरा बचपन वीडियो गेम के स्थान पर फुटबाल और तैराकी जैसे स्थूल खेलों में बीता है अतः वीडियो गेम के प्रभावों का व्यक्तिगत अनुभव मुझे कभी नहीं मिला। बचपन के अभावों को युवावस्था में पूरा करने का प्रयास किया तो सपनों में वही वीडियो गेम आने लगे। शीघ्र ही हमें पुनः स्थूल खेलों का आश्रय लेना पड़ा। अब बस कभी कभी केविट्रिक्स नामक वीडियो गेम खेल लेते हैं।
अपने बच्चों को वीडियो गेम में उलझा देखता हूँ तो मेरे मन की उलझन भी बढ़ने लगती है। कभी कम्प्यूटर के सामने, कभी टीवी के सामने, कभी आईपॉड के सामने और कुछ न मिले तो मोबाइल के सामने ही लगे रहते हैं दोनो। बालक टैंक और युद्ध वाले खेलों में जूझता है, बिटिया बार्बी के खेलों में उत्साहित रहती है। अभी तक विद्यालय खुले रहने से उन्हें मिलने वाला समय सीमित रहता था, पर अब परीक्षा समाप्त होने की प्रसन्नता और गीष्मावकाश होने के कारण समय की उपलब्धता,  इसी उत्साह में दिन का सारा समय वीडियो गेम में डूबता हुआ दिखता है। कुछ समझ में नहीं आ रहा है, समझाने में तर्क ढीले पड़ रहे हैं और अधिक डाटने से अवकाश का आनन्द कम हो जाने की संभावना भी है।
भगवान ने सुन ली और समाधान भेज दिया। समस्या गहरी थी अतः मँहगा मार्ग भी बड़ा सुविधाजनक लगा।
स्क्रीन में दौड़ तो आप ही रहे हैं
काइनेक्ट एक ऐसा वीडियो गेम है जिसमें आप ही उस खेल के एक खिलाड़ी बन जाते हैं। एक सेंसर कैमरा आपकी गतिविधियों का त्रिविमीय चित्र सामने स्थिति स्क्रीन पर संप्रेषित कर देता है और आप उस वीडियो गेम के परिवेश का अंग बन जाते हैं। आप स्क्रीन से लगभग 8 फीट की दूरी पर रहते हैं और खेल में भाग लेने के लिये आपको उतना ही श्रम करना पड़ता है जितना कि वास्तविक खेल में। गति और दिशा, दोनों ही क्षेत्रों में पूर्ण तदात्म्य होने को कारण कुछ ही मिनटों में आपको लगने लगता है कि स्क्रीन में उपस्थित खिलाड़ी आप ही हैं। यह अनुभव ही खेल का उन्माद चरम पर पहुँचा देता है। 
एथलेटिक्स, फुटबाल, बॉलीबाल, टेबल टेनिस, बॉक्सिंग, बाउलिंग, कार रेस, बोट रेस और ऐसे ही बहुत सारे खेल खेलने के बाद बस इतना ही कहा जा सकता है कि शरीर का श्रम वास्तविक खेलों जैसा ही होता है। रोचकता का स्तर बने रहने के साथ ही शरीर का समुचित व्यायाम ही इस खेलतंत्र की विशेषता है। बच्चों को खेलता देख हम भी अपना लोभ संवरण नहीं कर पाये और स्वयं को खिलाड़ी घोषित कर पहुँच गये। सामने सुपुत्र थे और उनका उत्साह बढ़ाती हमारी श्रीमतीजी, बिटिया परिवार में संतुलन लाने का प्रयास करती हमारी ओर थी। हम पूरी गम्भीरता से खेले और हार भी गये। हमारी बिटिया हमें सांत्वना देने के स्थान पर बहुत देर तक खेल की तकनीक समझाती रही। उत्साह में किये श्रम का पता तब चला जब सोने के एक घंटे पहले ही नींद आने लगी।
बचपन वापस आ गया है भाई

बच्चे प्रसन्न हैं कि वे वीडियो गेम खेल रहे हैं, हम प्रसन्न हैं कि बच्चों का शारीरिक व्यायाम हो रहा है, घर में उत्सव सा वातावरण है कि सारा परिवार मिल कर खेल रहा है। वीडियो गेम के बारे में हमारी पुरानी अवधारणा अपना स्वरूप खोती जा रही है, अब अभिवावकों को वीडियो गेम से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। काइनेक्ट न केवल मानसिक तीक्ष्णता बढ़ाता है अपितु शारीरिक शक्ति व संतुलन भी बनाये रखता है।

बच्चों की ऊर्जा ग्रीष्मावकाश में बहुत बढ़ जाती है। कॉलोनी के सभी बच्चों को व्यस्त रखने के लिये स्केटिंग, टेबल टेनिस, कैसियो और फ्रेन्च का विकल्प दिया गया है, पर आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिये कि लगभग सभी बच्चे किसी एक में नहीं अपितु चारों अभिरुचियों में भाग ले रहे हैं। बताइये, हम तो काइनेक्ट में ही थक जाते हैं, बच्चे हैं कि थकते ही नहीं हैं।


चित्र साभार –  http://www.kinectsgames.com/http://gamerant.com/
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