तुम ऐश्वर्यपूर्ण, गतिमय हो

by प्रवीण पाण्डेय

अमेरिका का प्रसंग आते ही हम भारतीयों के मन में एक भावभरी उत्कण्ठा जाग जाती है, सुख सुविधाओं का उद्यान, प्रतिभा का सम्मान, अस्तित्व युद्धों का अवसान, ऐश्वर्य का अभिराम, मानव आकांक्षाओं का निष्कर्ष धाम। एक कल्पनामयी डुबकी अमेरिका के विचारों में और लगता है कि मानो डिस्पिरिन मिल गयी हो, संघर्षों का सिरदर्द मिटाने के लिये, कुछ समय के लिये ही सही।
एक पूरा का पूरा समूह था आईआईटी में, जो येन केन प्रकारेण अमेरिका सरक लेने को आतुर था। उनकी भाव भंगिमा, भाषा, पहनावा आदि अमेरिका पहुँचने के पहले ही उसे समर्पित हो चुकी थी। भारत में बिताया जाने वाला शेष समय उन्हें अपने स्वप्नदेश जाने के पहले की तपस्या जैसा लगता था। अमेरिका की अद्भुत आकर्षण शक्ति का अनुभव हमें तभी हो गया था।
आज भी अमेरिका घूम आये नवप्रभावित युवाओं का उत्साह देखते ही बनता है, वहाँ तो यह है, वहाँ तो वह है, वहाँ सब कुछ है, आप अभी तक नहीं गये? सुन सुनकर ऊब चुके हैं अतः उस विषय पर नया प्रकरण प्रारम्भ होने के पहले ही मस्तिष्क की आवृत्ति उस बिन्दु पर नियत कर लेते हैं जिसके ऊपर से कोई भी प्रभावित करने वाला विचार मन में उतर न सके। आश्चर्य पर तब हुआ जब एक निकट सम्बन्धी ने स्तुति-स्वरों के विपरीत वास्तविक अमेरिका-कथा सुनायी।
बात उठी रेलवे के बारे में, मुझे अच्छा लगता है नये अनुप्रयोगों को जानना जिनके द्वारा यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा सके। बैठे बैठे कोई ऐसा तथ्य पता लग जाये जिससे कुछ और सुधार लाया जा सके, भारतीय रेलवे परिवेश में।
अमेरिका के कुछ गिने चुने नगरों की उपनगरीय सेवाओं को छोड़ दें तो शेष जगहों पर रेलवे की उपस्थिति नगण्य है। कम दूरी हो तो लोग अपनी कारों में जाते हैं, अधिक दूरी हो तो हवाई यात्रा करते हैं। रेलवे जहाँ पर भी है उसका उपयोग मूलतः माल ढोने में किया जाता है। लम्बी दूरी की ट्रेनों में और इन्टरसिटी ट्रेनों में 98% से अधिक अमेरिकियों ने अपने पैर भी न धरे होंगे।
पहले रेलवे, तब सड़क और अन्त में वायु की आधुनिक यातायात प्रणालियाँ अस्तित्व में आयीं। किसी भी देश के यातायात का मानचित्र देखें तो लम्बी दूरी की रेखायें रेलवे की होती हैं, रेलवे के बाद जो स्थान रिक्त रह जाता है उसमें सड़क यातायात की घनी रेखायें भरी होती हैं। वायु यातायात बहुत अधिक दूरी के लिये होता है और रेखाओं की संख्यायें कम होती हैं। यूरोप, जापान, चीन और भारत, हर देश में आपको यही अनुपात देखने को मिलेगा। प्रति यात्री किलोमीटर में लगी लागत के अनुसार भी देखा जाये तो रेलवे सर्वाधिक सस्ता साधन है, सड़क मध्यम और वायु सर्वाधिक मँहगा साधन है।  पर्यावरण की भी दृष्टि से भी रेलवे सड़क से 6 गुना स्वच्छ माध्यम है। रेलवे यात्रा अधिक सुविधाजनक होती है, कम लागत लगती है, प्रदूषण कम करती है और यातायात के लिये सर्वोत्तम है। इन साधनों का अनुपात आपको उस देश की अर्थव्यवस्था की दिशा का आभास दे देगा।
यह सब होने के बाद भी अमेरिका का रेलतन्त्र मोटर निर्माताओं और हवाई कम्पनियों के षडयन्त्र की भेंट चढ़ गया। जब रेल कम्पनियों के बोर्ड में फोर्ड और जीएम मोटर्स के अध्यक्ष रहेंगे तो आप और क्या निष्कर्ष पायेंगे। बताते हैं कि पिछले 60 वर्षों से यही अमेरिका के विकास की दशा और दिशा है। यदा कदा यदि किसी मार्ग में यात्री रेलगाड़ियाँ चल भी रही हैं तो उन्हें मालगाड़ियाँ आगे नहीं निकलने देती हैं।
हम प्रभुत्व हैं
अब कारों का किलोमीटर भर लम्बा जमावड़ा आपको दिखे तो समझ लीजियेगा कि अमेरिका है, यदि हर कार लगभग छोटे ट्रक के बराबर के आकार की हो तो समझ लीजियेगा कि अमेरिका है, यदि हर गाड़ी में एक ही व्यक्ति बैठा हो तो समझ लीजियेगा कि अमेरिका है। कोई आश्चर्य नहीं होगा आपको यह जानकर कि विश्व के औसत से दस गुना और भारतीय औसत से डेढ़ सौ गुना पेट्रोल अमेरिका में उड़ा दिया जाता है। यदि वायु यातायात की बात करें तो भी यही ऐश्वर्य हमें अमेरिका में दिखायी पड़ता है। अब नीरज जाट या अन्तरसोहिल अमेरिका पहुँच जायें तो उन्हे संघर्ष करना पड़ जायेगा घूमने के लिये।
यह ऐश्वर्य यातायात में ही नहीं अपितु उनकी जीवन शैली में भी दृष्टिगत है। हर क्षेत्र में रेलवेतन्त्र की ही तरह मितव्ययता अनुपस्थित है। अब परीलोक में कंगाली दिखे तो परियों का क्या होगा, मेरे उन मित्रों का क्या होगा जो उन परीस्वप्नों की खोज में वहाँ पहुँच गये हैं? जियें, आप ऐश्वर्यमय जियें, जियें आप गतिमय जियें, हम भारतीय अपनी रेलगाड़ी में मगन हैं।
बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना‘ जैसी स्थिति हमारी भी होती यदि अमेरिका की ऐश्वर्यपूर्ण जीवन शैली विश्व को प्रभावित नहीं करती। संसाधनों की सीमितता और उस पर आधारित सामरिक रणनीतियाँ विश्वपटल पर प्रधान हो गयी हैं। अमेरिका निवासियों को भी भान है इस स्थिति का, ओबामा प्रशासन भी ऐश्वर्यपूर्णता से निकलकर उन तन्त्रों को विकसित करने के लिये कटिबद्ध है जिससे संसाधनों की बचत की जा सके।
कुछ आप बढ़ें, कुछ हम बढ़ते हैं।
चित्र साभार – http://www.limousineservicedirectory.com/
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