नोकिया और माइक्रोसॉफ्ट

by प्रवीण पाण्डेय

बहुत अन्तर नहीं पड़ता किसी को, यदि मोबाइल का उपयोग मात्र बात करने के लिये ही किया जाता, पर न जाने क्या ललक है मानव मन की, जो हथेली के आकार के मोबाइल फोन से सब कुछ कर डालना चाहता है। श्रेष्ठतम पा लेने का यह उपक्रम, न केवल वातावरण को जिज्ञासु बनाये रखता है वरन मोबाइल बाजार में भी जीवन्तता बरसाये रहता है।
ऐसी ही एक हलचल हुयी पाँच दिन पहले जब नोकिया और माइक्रोसॉफ्ट ने हाथ मिला लिया और निश्चय किया कि आगे आने वाले नोकिया के सारे स्मार्टफोन विण्डो फोन 7 पर चलेंगे।
आप अपने मोबाइल से केवल बात ही करते हैं तो हजार रुपये से अधिक न व्यय करें उस पर। पर यदि आपके लिये मोबाइल का उपयोग अधिक है तो इस हलचल का मन्तव्य समझना होगा। उनके लिये महत्व और बढ़ जाता है जो अपने लैपटॉप या डेस्कटॉप और अपने मोबाइल के बीच नियमित समन्वय बनाये रखते हैं। इण्टरनेटीय क्लॉउड में अपनी सूचनायें और सामग्री रखने वालों के लिये इसे और भी गहनता से समझना चाहिये। मोबाइल, लैपटॉप और इण्टरनेट के त्रिभुज के बीच छिपा है आपके डिजिटल जीवन का रहस्य। यदि आप इन तीनों को भिन्नता में देखते हैं तो आप इस विकासीय त्रिभुज की परिधि से बाहर हैं।
विण्डो मोबाइल

मैं जब से विण्डो फोन उपयोग में ला रहा हूँ, मेरे लिये इस त्रिभुज में बने रहना बड़ा सरल हो चला है। सभी संपर्क, कार्य, समयबद्धता, नोट्स, लेखन और सूचना उपलब्धता, इन सभी क्षेत्रों में मोबाइल, लैपटॉप या इण्टरनेट पर किया हुआ कोई भी संपादन स्वमेव अन्य में पहुँच जाता है। कुछ सूझा, मोबाइल पर फ्रीहैण्ड से लिख लिया, लैपटॉप पर बैठे और उसमें कुछ जोड़ दिया। लेख और अनुसंधान एक दिन में अवतरित नहीं होते हैं, उस दृष्टि से इस प्रकार निर्बाध निर्माण होता है विचार-प्रवाह का। अन्य जनों की भागीदारी भी इण्टरनेट के माध्यम से समन्वय पा जाती है।

इस युद्ध में अब तीन योद्धा हैं, एप्पल जो अपना सॉफ्टवेयर और मोबाइल स्वयं बनाता है, गूगल जो एक ओपन सोर्स मंच तैयार कर रहा है और तीसरा यह गठबंधन नोकिया और माइक्रोसॉफ्ट का।
हर देश के लिये इस संघर्ष के संदर्भ अलग हो सकते हैं पर भारत के लिये इसका विशेष महत्व है। देश के लगभग 95 प्रतिशत से अधिक कम्प्यूटर माइक्रोसॉप्ट के सॉफ्टवेयर उपयोग में ला रहे हैं। नोकिया के मोबाइल लगभग 54 प्रतिशत लोगों के हाथों में हैं। जहाँ एक ओर माइक्रोसॉफ्ट मोबाइल क्षेत्र में अपनी पहुँच बढ़ाने के लिये प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर सुदृढ़ मोबाइल सॉफ्टवेयर के आभाव में नोकिया के हाथ से मोबाइल का बाजार खिसकता जा रहा है। यह गठबंधन जहाँ इन दोनों के लिये लाभप्रद है, वहीं हम उपयोगकर्ताओं के लिये समन्वय की दृष्टि से सरल है।
नोकिया विण्डो फोन

नोकिया की क्षमता मोबाइल सेटों के दमखम में है। बनावट, भाषा समर्थन, जनसाधारण तक पहुँच, मानचित्र और ओवी स्टोर का लाभ विण्डो फोन 7 के फोनों को मिलेगा। माइक्रोसॉफ्ट की क्षमता सॉफ्टवेयर में है। बिंग खोज, प्रचारतंत्र, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, विण्डो लाइव और ऑफिस डॉकुमेन्ट्स नोकिया के फोनों को और स्मार्ट बना देंगे। बहुत संभावना है कि हिन्दी कीबोर्ड उसमें आ जाये क्योंकि नोकिया सी5 में हिन्दी कीबोर्ड को लाया जा चुका है।

एप्पल के मोबाइल निसन्देह तकनीक के कई पक्षों में अग्रणी हैं पर उनकी कारागारीय मानसिकता में बँध कर रहना भारतीयों को भाता नहीं है। गूगल को विकास के लिये खुला मंच प्राप्त है पर अपना ओ एस न होने से लैपटॉप से समन्वय में उनकी सक्षमता बहुत कम है क्योंकि इण्टरनेट पर सतत निर्भरता भारत में अधिक संभव नहीं है। दोनों ही हिन्दी के क्षेत्र में अपने अपने उपेक्षा स्वर व्यक्त कर रहे हैं। इन स्थितियों में यह गठबंधन सशक्त लगता है और भारत के लिये अधिक संभावनाये लिये हुये है। भारत में पूर्ववर्णित त्रिभुज की समग्रता से देखें तो यही घोड़ा आगे निकलेगा।
मेरे विण्डो फोन को साढ़े तीन साल हो चुके हैं, हम दोनों एक दूसरे से प्रसन्न और संतुष्ट हैं। नोकिया के विण्डो फोन 7 की प्रतीक्षा करने को तैयार हूँ, अगले एक वर्ष तक, संभव है उसके पहले ही मुझे नया मोबाइल मिल जायेगा।  
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