खेलशैली, कार्यशैली, जीवनशैली

by प्रवीण पाण्डेय

कई दिनों से बैडमिन्टन खेल रहा हूँ और नियमित भी हूँ। शारीरिक श्रम के अतिरिक्त क्या और सीखने को मिल सकता है, इस खेल से? खेल के बीच में जो विश्राम के क्षण होते हैं, उस समय जब शरीर ऊर्जा एकत्र कर रहा होता है, अवलोकन अपने प्रखर रूप में होता है। पहले से ही लगने लगता है कि कौन सा खिलाड़ी अब कैसा शॉट मारने वाला है।

Badminton2कुछ खिलाड़ी परिश्रमशील होते हैं और सारे के सारे शॉट्स कोर्ट की पिछली रेखा पर खेलते हैं। यह बिना किसी विशेष कलात्मकता के खेल में बने रहने का गुण है, अपनी ओर से कोई भूल न करते हुये, सामने वाले को भूल करने के लिये विवश करने का। कुछ खिलाड़ी प्रारम्भ से ही ताबड़तोड़ तेज शॉट्स मारकर विरोधी को हतप्रभ करने में लग जाते हैं, पर उसमें स्वयं भूल की संभावनायें भी उतनी ही बढ़ जाती हैं। दोनों ही शैलियों में ही थकान बहुत होती है और ऊर्जा और कलात्मकता को अन्त तक बचा कर रखना कठिन हो जाता है। धीमे खेल में विशेष कलात्मकता आवश्यक होती है और थकान निसन्देह बहुत कम होती है। चतुर खिलाड़ी धीमे और तेज खेल या कहें तो कलात्मकता और गति का समुचित मिश्रण रखकर जीत पाते हैं। साथ ही साथ युगल खेल में जहाँ एक ओर आपकी सम्मिलित पहुँच पूरे कोर्ट में हो, वहीं दूसरी ओर समन्वय प्रतिपूरक हो।

Work1रोचक तथ्य पर यह है कि खिलाड़ियों की खेलशैली के बारे में अवलोकन जाना पहचाना सा लगता है। संक्षेप में कहें तो खेलशैली उनकी कार्यशैली से मिलती जुलती लगती है। कार्यक्षेत्र का व्यवहार, करने की गति, निहित कलात्मकता, आपसी समन्वय और योजित परिश्रम, उसी मात्रा में उनकी खेलशैली में परिलक्षित दिखता। परिश्रमी अधिकारी खेल में भी उतना ही परिश्रम करते हुये दिखे, जितना वे अपने कार्य क्षेत्र में लगाते हैं। यह बहुत संभव है कि किसी का बैडमिन्टन का खेल देख कर मैं उसकी कार्यशैली के बारे में बड़ी सटीक भविष्यवाणी कर सकूँ।

Familyकार्यशैली और खेलशैली में भले ही एकात्मक सम्बन्ध दिखे, जीवनशैली और कार्यशैली में वह एकात्मकता नहीं दिखी। तथ्य दो दिखायी पड़े। कुछ अधिकारियों का यह निश्चय रहता है कि कार्यक्षेत्र की किसी भी बात को वे घर के अन्दर नहीं लायेंगे और उसी प्रकार कार्यालय से अपने घर को दूर रखेंगे। उन अधिकारियों की कार्यशैली व जीवनशैली, गति, परिश्रम, कलात्मकता और समन्वय में एक दूसरे की पूरक दिखी। वहीं दूसरी ओर जो अधिकारी अपनी शैली सब जगह एक सी रखना चाहते हैं और उनमें अन्तर करने को अपने व्यक्तित्व पर एक कृत्रिम आवरण के रूप में मानते हैं, इन तीनों क्षेत्रों में एक जैसा व्यवहार करते दिखे।

क्या उचित है, इस पर एक स्वस्थ बहस हो सकती है। इस बहस से यदि मेरे खेल का स्तर बढ़ सके तो और भी अच्छा।
खेल में यदि भूल करने से मेरा अंक जाता है तो बड़ा क्रोध आता है स्वयं पर, वहीं दूसरे के अच्छे खेल पर उत्साहवर्धन भी करना अच्छा लगता है। इससे खेल निखर रहा है। कार्यशैली व जीवनशैली में यह गुण लाने का प्रयास है, जिससे कार्य व जीवन भी पल्लवित हो सके।
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