मुरलीधारी

by प्रवीण पाण्डेय

मैं अपूर्ण, प्रभु पूर्णपुरुष तुम,

मैं नश्वर, प्रभु चिरआयुष तन ।
मैं कामी, प्रभु कोटि कामरति,
मैं प्राणी, प्रभु सकल प्राणगति ।
मैं भिक्षुक, प्रभु दानवीर हो,
मैं मरुथल, प्रभु अमियनीर हो ।
मैं प्यासा, प्रभु आशा गगरी,
मैं भटकूँ, प्रभु उत्सवनगरी ।
मैं कुरूप, प्रभु रूपप्रतिष्ठा,
मैं प्रपंच, प्रभु निर्मल निष्ठा ।
मैं बाती, प्रभु कोटि दिवाकर,
मैं बूँदी, प्रभु यश के सागर ।
मैं अशक्त, प्रभु पूर्ण शक्तिमय,
मैं शंका, प्रभु अन्तिम निर्णय ।
मैं मूरख, प्रभु ज्ञानसिन्धु सम,
मैं रागी, प्रभु त्याग, तपोवन ।
मैं कर्कश, प्रभु वंशी सुरलय,
मैं ईर्ष्या, प्रभु प्रेम, प्रीतिमय ।
मैं प्रश्नावलि, प्रभु दर्शन हो,
मैं त्यक्त्या, प्रभु आकर्षण हो ।
मैं आँसू, प्रभु वृन्दावनसुख,
मैं मथुरा, प्रभु गोकुल उन्मुख ।
मैं मदमत, प्रभु क्षमानीर नद,
मैं क्रोधी, प्रभु शान्त, शीलप्रद ।
मैं पंथी, प्रभु अंतपंथ हो,
मैं आतुर, प्रभु अपना कर लो ।
मुरलीधारी मधुर मनोहर,
शापित शक्तिहीन सेवक पर,
बरसा दो प्रभु दया अहैतुक,
कृपा करो हे प्रेम सरोवर ।
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