सर तो बिजी है

by प्रवीण पाण्डेय

अहम् सूर्यम्

सरकार व नौकरशाही का प्रतीक है लाल बत्ती। कार्यालयों के बाहर लगी दिख जाती है। सामान्य व असामान्य मानसिकता के बीच की रेखा। इसके प्रमुखतः दो उपयोग हैं, पहला दूरी बनाने में और दूसरा स्वयं को व्यस्त बताने में। मेरे लिये इसका उपयोग तीसरा है। वाणिज्य विभाग में होने के कारण जनता व उनके प्रतिनिधियों से सीधा सम्पर्क रहता है। लगातार लोगों के आते रहने से फाईलें निपटाने का समय नहीं मिल पाता है। सप्ताह में एक दिन तीन घंटों के लिये इस ऐतिहासिक सुविधा का उपयोग फाईलों से दूरियाँ मिटाने के लिये होता है।

द्वारपाल महोदय आदेश पाकर सतर्क हो बैठ जाते हैं। उन तीन घंटों के लिये उनके हाथों में सारे अधिकार सिमट जाते हैं। आगन्तुक कोई भी हो, उत्तर एक ही मिलता है।
“सर तो बिजी है।”
यदि द्वारपाल महोदय को आप यह मनवा सके कि आप यदि अभी नहीं मिले तो बहुत बड़ा अनर्थ होने वाला है, तभी आपका नाम स्लिप में लिखकर अन्दर पहुँचाया जायेगा। नहीं तो आप कितनी भी अंग्रेजी बोल लें, उनको हिलाना असम्भव। बस एक ही उत्तर।
“सर तो बिजी है।”
एक दिन बाहर से कुछ बहस के स्वर सुनायी पड़े। एक लड़की जिद पकड़कर बैठी थी कि उसे अभी मिलना है। दस मिनट तक ध्यान बँटता रहा तो फाईल बन्द कर उन्हें अन्दर बुला लिया। लड़की उत्तर पूर्व से थी व बंगलोर में अध्ययनरत थी। घर में पिता का स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उन्हें उसी दिन गुवाहटी जाना था। पहले उन्हें पानी पिलवाया और उसके बाद एक इन्स्पेक्टर महोदय को बुला त्वरित सहायता कर दी गयी।
तनावमुक्त और अभिभूत हो उन्होने धन्यवाद तो दिया ही पर यह भी कहा कि आपने इतनी शिष्टता से सहायता की पर आपका द्वारपाल तो आने ही नहीं दे रहा था। उसको हटा दीजिये, आपकी छवि खराब कर रहा है। मैंने द्वारपाल के व्यवहार के लिये क्षमा माँग ली और कहा गलती मेरी ही है क्योंकि आदेश मेरा ही था। लड़की ने बताया कि वह भी सिविल सेवा की तैयारी कर रही है और उसमें सफल होने के बारे में मेरे अनुभव भी जानने चाहे। कार्य का क्रम टूट ही चुका था तो मैं भी एक भावी अधिकारी का भविष्य बनाने में लग गया। समय का पता नहीं चला और लाल बत्ती जलती रही।
द्वारपाल बाहर तने बैठे रहे। कई और लोग आये पर अब उनका उत्तर थोड़ा बदल चुका था।
“सर तो अबी बहोत बिजी है। अन्दर एक मैडम भी है।”
पता नहीं द्वारपाल महोदय लड़की से झगड़े का बदला ले रहे थे या हमारी छवि में चार चाँद लगा रहे थे।
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