फुटबॉलीय उत्सव

by प्रवीण पाण्डेय

वर्ल्डकप समापन की ओर बढ़ रहा है। यूरोपियन पॉवर गेम ने लैटिन अमेरिका के स्किल गेम को धूल धूसरित कर दिया है। दर्शकों का उन्माद चरम पर है और पार्श्व में अनवरत गूँजता यूयूज़ेला का स्वर। बड़ी बड़ी स्क्रीनों के सामने बैठे इस महायज्ञ में ज्ञान की आहुति चढ़ाते विशेषज्ञ। एक फुटबाल को निहारती करोड़ों आँखें।

यह खेल देखना जितना रुचिकर है, खेलना उतना ही कठिन। मैं उतनी ही बातें करूँगा जितनी अनुभवजन्य हैं, एक खिलाड़ी के रूप में।

तीन दायित्व हैं, फॉरवर्ड, मिडफील्डर और डिफेन्डर।

ज्ञाता बताते हैं कि फुटबॉल के लिये 3 ‘S’ की आवश्यकता होती है। गति(Speed), सहनशक्ति(Stamina) और कुशलता(Skill)।

तेज गति फुटबॉल की तेज पास के द्वारा, तेज गति आपकी जब फुटबॉल आपके पैरों के बीच हो और तेज गति वापस अपने पाले में आने की जब फुटबॉल विपक्षी के पास हो। अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी 100 मी की दौड़ 13 सेकेण्ड में पूरी कर लेते हैं, वह भी फुटबॉल के साथ। मैराडोना के पैरों में तो बिजली सी दौड़ जाती थी, फुटबॉल पैरों में आते ही। गति पूरे समय बनाये रखना संभव नहीं है। किस समय कितनी गति बना कर रखनी है, इसका निर्धारण मिडफील्डर करते हैं। उन्ही के पास अटैक की रूपरेखा रहती है।
 
सहनशक्ति गति को 90 मिनट तक बनाये रखने में सहायक सिद्ध होती है। एक व्यस्त खिलाड़ी उन 90 मिनटों में लगभग 10-12 किमी तक दौड़ लेता है, लगभग 30 प्रतिशत समय तेज गति से। यदि प्रारम्भिक खेल में ही सारी ऊर्जा व्यय कर दी तो बाद में विपक्षी हावी हो जायेगा। कब बॉल के साथ दौड़ना है, कब पास देना है, कब बॉल छीनने के लिये दौड़ना है, कब अन्य खिलाड़ी को मार्क करना है, यह सब सतत निर्णय लेने में मानसिक सहनशीलता भी दिखने लगती है। गति के बाद खेल के भाग्य खिलाडियों की सहनशीलता निर्धारित करती हैं।

कुशलता का मानक है नियन्त्रण। नियन्त्रण गति के साथ, थकान में, विपक्षियों के घेरे जाने पर, धक्का दिये जाने पर, पास दिये जाने पर, शॉट मारने में, शॉट रोकने में, अपने शरीर पर, फुटबॉल पर, हवा में, ज़मीन में, गुस्से में, निराशा में। पेले, रोसी और मैराडोना के पैरों में फुटबॉल नृत्य करती हुयी सी लगती है, पैरों का कहना मानती हुयी लिपट जाती है बूटों के इर्द गिर्द।

स्किल एकान्त में नहीं जीती है, जब तक टीम गेम न हो स्किल उभर कर सामने भी नहीं आती है। आपसी समन्वय और विपक्षी का खेल प्रारूप पढ़ पाने की क्षमता खेल को और गहराई दे जाते हैं।

जर्मनी, स्पेन और हॉलैण्ड ने गति और सहनशीलता से अर्जेन्टीना, पैरागुवे व ब्राजील के स्किल गेम को स्तब्ध कर दिया। सारे समय लैटिन टीमें घात का उत्तर ढूढ़ती हुयी दिखायी पड़ीं। गज़ब की तैयारी कर रखी थी यूरोपियन टीमों ने विपक्षी खिलाड़ियों की क्षमताओं पर। मेसी, रॉबिन्हो, रोनाल्डो आदि जैसे खिलाड़ियों को हमेशा चार खिलाड़ी घेर कर खड़े रहे और उन्हें निष्क्रिय कर दिया। साथ ही साथ जिस गति से खेल नियन्त्रित किया, विपक्षी डिफेन्स हर ओर से ढहता हुआ दिखा।

ऑक्टोपस महाराज की भविष्यवाणी से निराश जर्मनी की टीम स्पेन के सामने नतमस्तक हो गयी और भविष्यवाणी सच कर बैठी। लग रहा था उनके पैरों में ऑक्टोपस महाराज चिपक कर बैठे हों।

हॉलैण्ड और स्पेन में विजेता का निर्धारण होगा पर अब निर्णय स्किल पर होगा। दोनों ही टीमें पॉवर गेम में महारथी हैं। जो सामने वाले को आश्चर्यचकित कर ले जायेगा अपनी क्षेत्रसज्जा और स्किल से, वही जीतेगा। 

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